| أهواكِ؟ ما لِمُشَرَّدٍ أفراحُ |
| كيف الهوى والأغنياتُ نُواحُ؟ |
| أنا يا ابنةَ العشرين حقل صَبابةٍ |
| ومياه عشقي – في القديم – قَراحُ |
| لا تعذليني إنْ سَلَوْتُكِ، لم يَعُدْ |
| في خافقي للفاتناتِ مَراحُ |
| طيرٌ أنا قلبي، إذا سَكَنَ الدجى: |
| يمضي به نحو العراقِ جَناحُ! |
| للأرضِ إحساسٌ كما إحساسُنا |
| ولها – كمثلِ حياتنا – أَرْواحُ! |
| يا بَيْدَرَ الصَبَواتِ إنَّ لنا غداً.. |
| مهما اسْتَبَدَّ بسيفِهِ السفَّاحُ |